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शुक्रवार, 5 जून 2020

धोखा खाय हँव(रोहित ,पार्री बड़गांव)

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हं धोखा बहुत मय  हर खायेंव।
पल पल आंसू मय हर बहायेंव।

कोन कर ही ग अब भरोसा मोर।
देवी बना के रखेंव दिल  म मोर।।
लूट डारिस बैरी लबरी के लबारी।।
अउ पूजेंव ओला जइसे मे पुजारी।।

मया म दगा बस मय हर पायेंव ।
पल पल आंसू मय हर बहायेंव।।

लइस  कफ़न बइरी हर संउक ले।
अउ फेक के चल दिस चंउक ले।।
आ बैठ गे मोर मैयत के पंगत म।
खूब हसिस दोगली चार संगत म।।

हं धोखा बहुत मय हर खायेंव।
पल पल आंसू मय हर बहायेंव।
         💘रोहित बारले💘

सिरतो मा आ जाना (कन्हैया लाल बारले ,कोचेरा)

💗सिरतो म आ जाना 💗

सपना मा नइ  आवास त,
 नइ  देवंव  मेहा गारी ।
सिरतो मा तैंहा  
मोर आना संगवारी ।
(1)
पहिली नजर म तैं ,
मोर मन ल  भाये  ।
आंखी  आंखी  म तैं ,
मया गोठियाये  ।
(कहां लुकाये तैंहा,,,,)2 
मया होगे भारी ।,,,,,
सिरतो म तैंहा  
मोर आना संगवारी ।,,,,,,,,
(2)
आंखी  के रद्दा ले तैं ,
 जिनगी म मोर आये ।
मया गोठिया के तैं ,
मन ल मिलाये ।
(जिनकी भर तोला मया करहुँ)2  मैं नइ कहंव  लबारी ।
सिरतो म तैंहा  
मोर आना संगवारी ।,,,,,,,,
(3)
तोर बिना मोर ,
जिनकी हावे सूना ।
मया के आगी  भड़के ,
जइसे पानी म चूना ।
(सिरतो म आजा ना तैं)2
तोला बनाहुँ मोर सूवारी ।
सिरतो म तैंहा 
मोर  आना संगवारी ।
(4)
तोर आये  ले जिंनगी के बगिया, हरीयर हरीयर होही ।
तोर कोरा म फूल फूलही ,
भरोसा हावे मोर जोही ।
 (सुनता ले हमन जिंनगी पहाबो)))2
 अंगना म होही किलकारी ।
सिरतो म तैंहा  
मोर आना संगवारी,,,,,,,


✒️कन्हैया लाल बारले✒️
कोचेरा डौन्डी लोहारा 
जिला बालोद (छत्तीसगढ़)

वो करीब आयी दफनाने के बाद (आर.एस.बारले)

शनिवार, 16 मई 2020

वक्त गुजरा हुआ


रचनाकार -- प्रवीण कुमार ठाकुर
जिला -- राजनांदगाँव ( छ.ग.)
विधा -- गीत 
शीर्षक --  "वक्त गुजरा हुआ "
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वक्त गुजरा हुआ ,फिर याद आया ।
कोई भूला हुआ ,फिर याद आया ।।
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                भूलने की कोशिश में ,
                दूर होते गए ।
                ये दुरियां ही ,
                हमें करीब लाया ।।1।।
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भूला भी नहीं उन्हें ,याद करता भी नहीं ।
भूलने की कोशिश ने, दिल में कहर ढा़या।।2।।
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              वो तो कहते हैं बेखबर ,
              हम उनसे हो गए ।
              उनकी बातें ही ,
              दिल जिगर में छाया ।।3।।
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तस्वीर दिल में ,आँखों में बरसात है ।
प्यास आँखों में ,हमने कोई पाया ।।4।।
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          वक्त गुजरा हुआ ,
          फिर याद आया ।
          कोई भूला हुआ ,
          फिर याद आया ।।5।।

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व्याख्या  --  
उपरोक्त पंक्तियों में मैने प्रेम की उस स्थिति को उकेरने का प्रयास किया है जब प्रियतमा अपनी प्रियतम से बिछड़ जाती है तब उनके ह्रदय की दशा क्या होती है ।दोनों ही बिते हुए क्षण और भूले , बिछडे़ साथी को याद करते हैं ।और भूलने की कश्मकश में वे यादों के सहारे और भी अधिक करीब आ जाते हैं ।पहले तो दोनों ही ना तो एक दुसरे को स्मरण करते थे ना ही भूले थे ,परन्तु भूलने की कोशिश ने विरह अग्नि को और भी प्रबल कर दिया ।दोनों ही एक दुसरे पर भूल जाने का मिथ्या दोषारोपण करते हैं  पर ऐसा नहीं है , इन दोनों के दिल दिमाग मे हर जगह वे ही समाहित होते हैं ।दोनों के मन में विरह के कारण साथी की ही मूरत मन में बसी थीऔर नैन एक झलक के लिए प्रियतम ,प्रियतमा के निरंतर अश्रु बरसात करते हैं इसके बाद भी आँखों में यार के लिए कैसी प्यास थी ।।
         रचनाकार 
  प्रवीण कुमार ठाकुर 
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