मधुर काव्यांजलि
मधुर मधुर रचनाकार है,लिखते विविध विधान। करते सेवा चौमुखी, करते नित पहचान।।
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बुधवार, 29 अप्रैल 2020
पोथी
पोथी पढ़ो पुरान,बिना गुरु के ज्ञान नहीं।
राम कृष्ण भगवान,भला छुटकर रहे कहीं।
बालक ध्रुव प्रहलाद,भक्ति मति माता शारद।
जन्म हुआ आबाद,मिले गुरु जैसे नारद।
अरुण निगम गुरुदेव जी,मिले सदा आशीष हो।
छंद के छ परिवार ये,चमके लाख बरीष हो।
तोषण दिनकर
कृपा
सुप्रभातम्
छप्पय में एक प्रयास
बरसे मुझपे आज,कृपा जी रघुवर तेरी।
पूरन कर दो काज,धन्य हो जीवन मेरी।
जपूँ नाम दिन रात,आस ये लेकर मन में।
दैहिक भौतिक ताप,समाये मत इस तन में।
विनती है कर जोड़कर,सब कुछ तेरे हाथ में।
छुट जाए सारे जगत,रहना बस तुम साथ में।।
-तोषण दिनकर
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