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बुधवार, 29 अप्रैल 2020

बाकी है

*बाकी है...*

मुश्किलों के दौर में एक आस बाकी है।
दूर तुम भी दूर हम भी एहसास बाकी है।

सम्हाले रख्खा है अब तलक ये दिल को,
आने को अभी नया मधुमास बाकी है।

जल्द मिटेंगे गिले शिकवे बुरे वक्त सारे,
दिन नव किरण का पल खास बाकी है।

सुनी पड़ी मधुबन ओ कान्हा रसिया की,
सुर्ख हुए वृंदावन की महारास बाकी है।

चाहत "दिनकर" की मिलने की तुझसे,
करने को बस रब से अरदास बाकी है।


-तोषण कुमार "दिनकर"

सुन मेरे भगवान

सुन मेरे भगवान सुन मेरी पहचान बनादे।
आदमी हूँ आदमी मुझे बस इंसान बनादे।

नफरत न हो किसी से जब तक है जिंदगी ,
जान बीते खातिरदारी में मेजबान बनादे।

सहारा बेसहारों का भूखे का निवाला बनूँ,
बढ़ाता चलूँ सबकी कद कदरदान बनादे।

रखूँ समेट कर ये सारे गुलशन जहाँ का,
मुस्कुराते गुलों का मियाँ बागबान बनादे।

फक्र करे तुझ पर दिनकर ए आसमान,
खुशियों से भरा एक हिन्दुस्तान बनादे।

तोषण कुमार चुरेन्द्र " दिनकर"