शुक्रवार, 5 जून 2020

विश्व पर्यावरण (हर्षा देवांगन 'हर्षराज)

मेरी नई रचना (विश्व पर्यावरण दिवस पर)
दिल की कलम ✍️ से.... 


वट की जड़ें होती गहरी 
सिखा देती पीपल ज्ञान 
नीम सदा कड़वाहट देता 
न कभी सहता अपमान 

रसों में है आंवले का रस 
जीवन में अपना लेना तुम 
कर लें मित्रता बबूल से 
इसका गुण न भुला देना तुम 

कर ले सुरक्षित जीवन अपना
जग को सारे महकाना है 
गुण चंदन का करके धारण 
जीवन में अपनाना है 

कंदमूल जड़ी बूटी सारे
फल फूल सभी का है कहना 
मत कम से आँकों तुम मुझे 
हम हैं हर प्राणी का गहना 

कितनी सुंदर है धरती 
रूप प्रकृति और पर्यावरण 
सब की जीवनदाती प्रकृति का 
हम मिलकर करते हैं संरक्षण 

जैसे बारिश की टिप-टिप बूंदे 
सबके मन को है भाती 
हरा भरा प्रकृति सौंदर्य से 
सबको है जीवन दे जाती 

आओ सब मिल एक पेड़ लगाए 
करते रहें जग का कल्याण 
हम सुधरेंगे जग सुधरेगा
तभी तो बनेगा देश महान

श्री मती हर्षा देवांगन ' हर्षराज '
मधुर साहित्य परिषद डोंडी लोहारा

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