सुप्रभातम्
छप्पय में एक प्रयास
बरसे मुझपे आज,कृपा जी रघुवर तेरी।
पूरन कर दो काज,धन्य हो जीवन मेरी।
जपूँ नाम दिन रात,आस ये लेकर मन में।
दैहिक भौतिक ताप,समाये मत इस तन में।
विनती है कर जोड़कर,सब कुछ तेरे हाथ में।
छुट जाए सारे जगत,रहना बस तुम साथ में।।
-तोषण दिनकर
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