बुधवार, 29 अप्रैल 2020

संस्कार



संस्कार 

अमूल्य निधि जीवन की
हमारा हिन्दु संस्कार है ।
स्वरुप निर्धारित हो जिनसे ,
व्यक्तित्व का आकार है ।

अमृत है संस्कार हमारा,
यहाँ जीवन की हर रीत है ।
त्याग तपस्या संकल्पों से ।
जीवन में सारे जीत है ।

झुकें सदा बड़ों के आगे ,
संस्कार हमारा कहता है ।
कठोर तो टुट जाता है ।
जो झुके बना वो रहता है ।

बोझ नही संस्कार जीवन मे ,
यह तो सिर का ताज है । 
तेरी ये घूँघट नहीं मजबुरी,
यह तो तुम्हारी लाज है ।

बेड़ियाँ नही हे ये पायल ,
संगीत है किलकारी की ।
घुटन नही है अनुशासन ,
ये प्रेम है जिम्मेदारी की ।

सँस्कृति की हर बागों मे ,
संस्कार सुमन खिलता है ।
सफलता हर जीवन की  ,
संस्कारों से ही मिलता है ।

संस्कारी हो जीवन सबका ,
सभ्य समाज निर्माण हो ।
महापुरुषों के पद चिन्हों पर ,
इस जीवन का निर्वाण हो ।

🙏🏻 लालेश्वर साहू "अरुणाभ "

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