बुधवार, 29 अप्रैल 2020

साहित्यकार नहीं



अब लड़ना हमे है धर्म युद्ध
आयेगा कोई अवतार नही
देखे मुक दर्शक बन तम्आशा
वो कोई साहितकार नही

जयचंदो की जयचंदी भी
अब और हमे स्वीकार नही
जो चीख न सुने अपनो का
उससे बढकर गद्दार नही

वो कायर है उनपे लानत है
इंसानो से जिनको प्यार नही
ये हृदय विदारक घटना है
कोई झूठा अखबार नही

ये, संतो की है कुर्बानी
जायेगा कभी बेकार नही
निर्दोषो का जो प्राण हरे
इन कुत्तो को अधिकार नही

अन्याय अत्याचार ले लड़ना
जिन लोगो को स्वीकार नही
जंग लग चुकी कलम मे जिसकी
वो कोई साहितकार नही

-परमानंद प्रकाश

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